शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

ऐसा भारत सजाइए



कवित्त छंद (वार्णिक छंद)-वर्ण क्रम ८+८+८+७=३१
ऐसा भारत सजाइए  

इस देश के निवासी,बनों अ-विनाशी यहाँ,

भारती की आन और,शान को बढ़ाइये|

रावण पे बाण मारो, राम का आदर्श धारो,

मर्यादा की सीमा रेखा,सब को सिखाइये||

नदियाँ हो दूध भरी,हीरे मोतियों से जड़ी, 

वसुधा कुटुंबकम,बीज उपजाईये|

भाषाओं में मेल बढ़े,आपस में नाहीं लड़ें,

अनेकता में एकता,भारत सजाईये||

रखना है एक यदि,अखंड अभेद सभी, 

राष्ट्र भाषा मान प्रेम,हिंदी अपनाईये|

बने सर ताज हिंद,संस्कृतियों का बिंब, 

जग  में तिरंगा सब,तरफ सजाईये|| 

धर्म जाति भाषा प्रान्त,भेद नहीं करें यहाँ, 

भारत के वासी हम,गले लग जाईये|

संतों का ये देश सजे,देवताई भेष बने, 

हर एक भारतीय,भारती कहाईये||

माँ भारती की आन पे,हथेली में जान लिये,  

करें बलिदान यहाँ,खुद को चढ़ाईये|

दुनियाँ के पटल में,नाम और काम दिखा, 

सपने हो सच सभी,काम कर जाईये||

उमाशंकर मिश्रा 

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (22-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय गुरूजी आपका सादर आभार
      आपका इस ब्लॉग में आना मेरे लिए अत्यंत सुखद है
      हार्दिक धन्यवाद

      हटाएं
  2. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ।

    आप का कवित्त, मन भाये अति मित्र
    आप लेखनी को लिख लिख कर के चमकाईये ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए दिल से आभार.
    बहुत ही अच्छा लिखा है आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  4. उत्तर
    1. आदरणीया आप ने इस ब्लॉग में आकार मान बढ़ाया
      सादर आभार

      हटाएं
  5. उत्तर
    1. आदरणीय प्रदीप कुमार जी हार्दिक धन्यवाद

      हटाएं
  6. हिंदी-भाषा मास पर , उत्तम हिंदी छंद
    मन पढ़कर सुख पा रहा,खूब मिला आनन्द
    खूब मिला आनंद , आपने ज्ञान बढ़ाया
    कैसा होय विधान , सरलता से समझाया
    अन्य छंद का ज्ञान , दीजिये है अभिलाषा
    देव - नागरी अमर ,अमर हो हिंदी भाषा ||

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय अरुण भाई आपकी टिप्पणी टिप्पणी नहीं आभूषण है
      रचना के मान के साथ ब्लॉग की सुंदरता भी बढ़ा देती है
      हार्दिक आभार

      हटाएं