सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

गजल

                         देश के बैरियों का करूँगा कतल |

हिंदू मुस्लिम का है  कहा कौन है ?
खून किसका बहा है बता कौन है ??
          
    उनकी महफ़िल में कैसी तकरीर थी
कट गई गरदने लापता कौन है?
          
          दंगे भड़के नहीं यूँ लगाये गए |
तल्ख़ किसने कहे सरफिरा कौन है?
          
    देश से दुश्मनी किसके कहने पे की ?
जहर किससे पिया जानता कौन है ??
          
    हर तरफ थू थू की आवाज थी |
फूल सा मुस्कुराता हुआ कौन है ??
          
         तुम नादान थे क्या जानों खता |
जख्म माँ ने सहे मानता कौन है ||
          
    अपनी माटी से उपजी कैसी फसल ?
बो रहा कोई है काटता कौन है??

वतन को सम्हाले या जेबे भरें
जेब कितनी भरी झांकता कौन है ??
          
    देश के बैरियों का करूँगा कतल |
है जुनूने वतन जानता कौन है ||

उमाशंकर मिश्रा

6 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन अभिव्यक्ति.....बहुत बहुत बधाई.....

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आद.प्रसन्नवदन चतुर्वेदी जी धन्यवाद

      हटाएं
  2. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 04/03/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 231 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय कुलदीप ठाकुर जी इस सम्मान के लिये हार्दिक आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. सच्ची व बहुत ही सुन्दर शब्द रचना
    नव बर्ष की शुभकामनाएं
    http://savanxxx.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं