रविवार, 12 अगस्त 2012

चन्द्रमा के चित्र पर आधारित




चंद्र शिव भाल लगाय


विष ज्वाला शीतल करन, शिव जी भाल लगाय|
                   
अर्ध - चन्द्रमा सोहते, औघड़ रूप सजाय||
                   
औघड़ रूप सजाय, बने थे शिव जी जोगी|
                   
तब से वर्षा करे, चन्द्र बन अमृत डोंगी||
                   
चन्द्र किरण की आब, बने अमृत का प्याला  |
                   
शरद पूर्णिमा रात, भसम हो विष की ज्वाला||

ओ.बी.ओ.महोत्सव में शामिल 

उमाशंकर मिश्रा 

दुर्ग छ.ग.

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह,,,,बहुत खूब,सुंदर प्रस्तुति,,,,,
    मिश्रा जी,,,बधाई,,,,
    RECENT POST ...: पांच सौ के नोट में.....

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  2. उमाशंकर मिश्र जी ,कुण्डलिया कह जाय |
    चंदा शिव के भाल क्यों,सुंदर बात बताय ||

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  3. भाई आपकी सार्थक टिपण्णी ने अभिभूत कर दिया

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