गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

जन्म सिद्ध अधिकार है


जन सेवा मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है|
मुझे देश की    भावी जनता से प्यार है||
मुझे कुर्सी दिलाने में    इनका     हाथ है|
मेरी झोपड़ी को महल बनाने में इनका साथ है|
इनके अहसानों के बदले देता हूँ आश्वासन||
बड़े मुश्किल में तैय्यार किये भाषण|
कागज के पन्नों में बांटता हूँ राशन||
इतने करने में भी ये जनता रोती है|
किये कराये कर्मों को आसुओं से धोती है ||
अरे..मै मंत्री हूँ ....
कुछ कद्र करो मेरे आश्वासनों की |
मेरे मुखाग्र वृन्द से कहे सम्भाष्णो की ||
क्या जनसेवक होना छोटी बात है ?
तुम हो एक वोट,जो तुम्हारी जात है ||
तुम्हारी दिलाई कुर्सी कल छीन जायेगी |
हमारा आश्वाशन हमेशा जिन्दा रहेगा ||
अमर रहेगा.....
तुम्हारी रोतीं बिलखती आँखों को धिक्कार है |
मुझे तुम्हारे खून के एक एक कतरे से प्यार है||
जनसेवा मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है.....
जनसेवा मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है.....

उमाशंकर मिश्रा 

  

3 टिप्‍पणियां:

  1. हिंदी ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है.बेहतरीन हास्य-व्यंग्य रचना से श्रीगणेश किया है.आपकी लेखनी का स्वाद चखने को मन सदा प्रतीक्षारत रहेगा.

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  2. welcome....
    अच्छी रचना को प्रस्तुत करने का आभार..... आगे भी प्रतीक्षा रहेगी

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