मंगलवार, 20 नवंबर 2012

दोहे


ठेस
जिन की ख़ातिर मैं मरा, मिले उन्हीं से शूल |
चन्दन अपने पास रख, मुझ को दिये बबूल ||

गर्व सदा जिन पर किया ,धन माया को  जोड़|
वे  ही  कांधे  पर तुझे  , आये  मरघट  छोड़||

उम्मीद
पिया मिलन की आश में, मन ज्वाला बरसाय|
पल पल बीता जा रहा, उमर न ढहती जाय||

सौंदर्य
लरजत फरकत होंठ हैं ,तिरछी नजर कटार|
ओंठ दाँत से चाबती, गाल हुवे अंगार||

आश्चर्य
संसद पारित हो गई,ऐसी ही तरकीब|
दौलत अपनी बाँट के, नेता हुए गरीब||

हास्य व्यंग्य
इम्तहान की कापियाँ ,ली गइयन ने खाय|
गुरुजी गोबर देखकर , नम्बर रहा बनाय ||

विरोधाभास 
गरम चाय को फूंक लो, ठंडी वो हो जाय|
धुँवा परत अंगार को, फूंकत आग लगाय||  

सीख
दूध फटा  गम तो हुआ ,  कैसे पीयें चाय|
रसगुल्ला बनवायके ,घर घर दियो बँटाय ||

तना तना इठलात है,पल में दिया उखाड़|
जो डाली झुक जात हैखड़ी रहत है ठाँड़||

उमाशंकर मिश्रा 

8 टिप्‍पणियां:

  1. उच्च-कोटि के दोहरे, तरह तरह के स्वाद ।

    भ्रात उमा स्वीकारिये, देता रविकर दाद ।।

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  3. ठेस
    जिन की ख़ातिर मैं मरा, मिले उन्हीं से शूल |
    चन्दन अपने पास रख, मुझ को दिये बबूल ||

    गर्व सदा जिन पर किया ,धन माया को जोड़|
    वे ही कांधे पर तुझे , आये मरघट छोड़||

    उम्मीद
    पिया मिलन की आश में, मन ज्वाला बरसाय|
    पल पल बीता जा रहा, उमर न ढहती जाय(||उमरिया ढहती जाय ....)

    सौंदर्य
    लरजत फरकत होंठ हैं ,तिरछी नजर कटार|
    ओंठ दाँत से चाबती, गाल हुवे अंगार||

    आश्चर्य
    संसद पारित हो गई,ऐसी ही तरकीब|
    दौलत अपनी बाँट के, नेता हुए गरीब||

    हास्य व्यंग्य
    इम्तहान की कापियाँ ,ली गइयन ने खाय|
    गुरुजी गोबर देखकर , नम्बर रहा बनाय ||(लगाय )

    विरोधाभास
    गरम चाय को फूंक लो, ठंडी वो हो जाय|
    धुँवा परत अंगार को, फूंकत आग लगाय||

    सीख
    दूध फटा गम तो हुआ , कैसे पीयें चाय|
    रसगुल्ला बनवायके ,घर घर दियो बँटाय ||

    तना तना इठलात है,पल में दिया उखाड़|
    जो डाली झुक जात है, खड़ी रहत है ठाँड़||दो अलग अलग क्रियाएं हैं यहाँ तने का तना होना और डाली का झुकना ,भाव का निर्वाह यहाँ ठीक से नहीं हुआ है .

    बढ़िया मनोहारी छटा मनो -भावों की बिखेरते उकेरते कैप्सूल्स से दोहे .बधाई .

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  4. आदरणीय वीरू भाई जी तना तना इठलात है का तात्पर्य १ इंसान की हेकड़ी से है दूसरा अर्थ यह भी है की जो तना ..अकड़ में रहता है याने तना हुवा रहता है
    आपकी प्रतिक्रिया ने मन मोह लिया है

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  5. कनक कनक से सौ गुनी मादकता अधिकाय ,

    या पाय बौराए जग वा खाए बौराय .

    कनक कनक से सौ गुनी मादकता अधिकाय ,

    या पाय बौराए जग वा खाए बौराय .

    यहाँ भी यमक ही है .कनक सोना /धतूरा /गेंहू

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